'वेस्ट टू एनर्जी प्रोसेेस' तकनीक का उपयोग किया गया तो भारत ही नहीं बल्कि विश्व स्तर के कचरे का निदान किया जा सकता है-स्वामी चिदानन्द सरस्वती
ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में मुम्बई महाराष्ट्र से वैज्ञानिक श्री मैथ्यू पधारे उन्होने परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी से भेंट कर वेस्ट टू एनर्जी प्रोसेस मशीन के बारे में जानकारी प्रदान की। स्वामी जी ने कहा कि इस मशीन के माध्यम से हम हर स्लम प्वांइट को सेल्फी प्वांइट में बदल सकते है।
वेस्ट टू एनर्जी प्रोसेस के अन्तर्गत अपशिष्ट से ऊर्जा-अपशिष्ट कचरे के प्राथमिक उपचार से बिजली और गर्मी के रूप में ऊर्जा उत्पन्न करने की प्रक्रिया है उसी के तहत मुम्बई, महाराष्ट्र से आये वैज्ञानिक श्री मैथ्यू ने सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के अनुकूल एक 'वेस्ट टू एनर्जी प्रोसेस' मशीन का निर्माण किया है।
वैज्ञानिक श्री मैथ्यू के साथ श्री नितिन पवार और श्री बलमवार जी मुम्बई से आये उन्होने स्वामी जी के पावन सान्निध्य में विश्व स्तर पर स्वच्छ जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।
वैज्ञानिक और सेन्जो ग्रुप आॅफ कम्पनी के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री मैक्यू ने कहा कि हम मशीनरी उत्पादों के निर्माण और डिजाइनिंग में दुनिया की अग्रणी कंपनियों में से एक बनाने के लिये प्रतिबद्ध है। हमारा उद्देश्य सुरक्षा, गुणवत्ता और सेवा करना है। मैने जो मशीन बनायी है उसके पेटेन्ट दुनिया के कई देश खरीदना चाहते है परन्तु मैने अपनी मशीन का पेटेन्ट भारत को दिया है क्योकि इसके माध्यम से बाहर का पैसा भी भारत में ही आयेगा। इस प्रकार हम भारत से गरीबी को दूर कर सकते है और अपने राष्ट्र को कचरा मुक्त और प्रदूषण मुक्त राष्ट्र बना सकते है। उन्होने बताया कि छटवी कक्षा तक उन्होने स्कूली शिक्षा प्राप्त की और अब तक लगभग 40 अत्यंत उपयोगी मशीनों का निर्माण कर चुके है। अभी हाल ही में एक ऐसी तकनीक का आविष्कार किया जिसमें उपर छत पर लटका पंखे को बटन दबाते ही नीचे लाया जा सकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि भारत में कचरा प्रबंधन एक बड़ी समस्या है। जहां देखो वहां पर कचरे के पहाड़ लगे हुये है। जिस वेग से हमारे देश की आबादी बढ़ रही है कचरा के पहाड़ भी उतनी तेजी से उंचे होते जा रहे है। वर्तमान समय में कचरे के ढ़ेरों में सबसे ज्यादा प्लास्टिक दिखायी पड़ता है। उन्होने कहा कि हमें अब वैज्ञानिक तरीके से कचरे के निपटारन की आवश्यकता है तभी हम कचरे के लगते पहाड़ों को कुछ हद तक कम कर सकते है। स्वामी जी ने कहा कि स्वच्छता को स्वीकार करने का यह तात्पर्य है कि गंदगी को कम करना न की कचरे के ढ़ेर लगाना है। हम सभी को ध्यान देने की जरूरत है कि आज हमारे देश में कचरे की यह स्थिति है कि हम उससे निपट नहीं पा रहे तो क्या हमारी आगे आने वाली पीढ़ियाँ इन कचरों के पहाड़ों के साथ कैसे जीवन यापन करेंगी। उन्होने कहा कि देश का प्रत्येक व्यक्ति केवल अपने कचरे की जिम्मेदारी ले तो यह समस्या अपने-आप हल हो जायेगी क्योकि मेरा कचरा मेरी जिम्मेदारी यही भाव हो हम सभी का।
वैज्ञानिक श्री मैथ्यू और उनके सहयोगियों ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के साथ मिलकर विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया।वैज्ञानिक श्री मैथ्यू ने कहा कि परमार्थ निकेतन यात्रा अत्यंत आनन्द दायक रही। यहां व्याप्त शान्ति और पवित्र व निर्मल गंगा तट देखकर मैं अभिभूत हो गया। उन्होने कहा कि कचरा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के लिये हम स्वामी जी के साथ मिलकर कार्य करेंगे।