सनातन संस्कृति व धर्म को बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं संत: कैलाशा नन्द


घटती हुए जनसँख्या अनुपात और बढ़ते हुए जातिवाद ने सनातन धर्म को विनाश की ओर धकेला-यति नरसिंहानन्द 
*********************************
हरिद्वार।श्रीब्रह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अधीर कौशिक के साथ जिला ग़ाज़ियाबाद स्थित शिवशक्ति धाम डासना के अधिष्ठाता यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज,हिमाचल प्रदेश से आये दिव्यांग संत योगी ज्ञाननाथ जी महाराज,बाबा परमेन्द्र आर्य तथा अन्य संत व भक्तगणों की"धर्म जगाओ, अस्तित्व बचाओ" पदयात्रा तीसरे दिन प्रातः गौरी शंकर गौशाला आश्रम में बाबा हठयोगी जी महाराज, दक्षिण काली मंदिर में महामण्डलेश्वर कैलाशनन्द जी महाराज,श्यामपुर कांगड़ी में स्वामी धर्मवीर महाराज सिरसौत वाले,स्वामी सत्यव्रतानन्द सरस्वती जी महाराज,बालाजी धाम में स्वामी प्रबोधानन्द गिरी जी महाराज तथा अन्य संतो की शरण में पहुँची, जहाँ पदयात्रियों ने अपनी पीड़ा संतो के सामने रखी।पदयात्रियों ने जूना अखाड़ा,मायादेवी मंदिर,श्री आनन्द भैरवदेव मंदिर,श्री निरंजनी अखाडा, सिद्धपीठ हनुमान मंदिर के भी दर्शन किये।हर जगह यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने संतो के चरणों में एक ही प्रार्थना रखी की संत समाज हिन्दू समाज और सनातन धर्म को बचाने के लिये आगे आये और एक नया इतिहास लिखे।उन्होंने कहा की हिन्दुओ के घटती हुए जनसँख्या अनुपात और बढ़ते हुए जातिवाद ने सनातन धर्म को विनाश की ओर धकेल दिया है। इन दोनों समस्याओं ने आज महामारी का रूप ले लिया है।ये हिन्दू समाज की आंतरिक समस्याएं हैं जिन्हे संत समाज ही खत्म कर सकता है।संत समाज की शक्ति अपार है परंतु कुछ ज्ञात अज्ञात कारणों से संत अपनी शक्ति को भूल कर धर्म रक्षा के प्रति निष्क्रिय हो गये हैं।धर्म रक्षा के क्षेत्र में संतो की निष्क्रियता सनातन धर्म के लिये बहुत अशुभ संकेत है।पदयात्रियों का अपनी गौरीशंकर गौशाला में स्वागत करते हुए हठयोगी जी महाराज ने कहा की इस समय सनातन धर्म को विराथु की जरूरत है।जैसे विराथु ने म्यांमार से जिहादी गन्दगी को साफ किया,अब वो ही कार्य यहाँ भी होना चाहिये।पदयात्रियों में डॉ राजा गौतम,विपिन मिश्रा, मोहित बजरंगी,सुनील प्रजापति भी शामिल थे।