आपसी भाईचारे का पैगाम देता है ईद मिलादुन्नबी त्योहार : एडवोकेट रीमा
राव शब्बूर अहमद
हरिद्वार 10 नवंबर रविवार । प्रत्येक वर्ष रबी उल अव्वल कि 12 तारीख को भारत सहित दुनिया भर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला जश्ने ईद मिलादुन्नबी त्यौहार आपसी भाईचारे का पैगाम देता है । वैसे तो साल भर में कई त्यौहार आते हैं मगर यह दिन इसलिए बेहद खास है क्योंकि 571 ईसवी में इसी दिन पैगंबर नबी हजरत मोहम्मद साहब का जन्म अरब के मक्का शहर में हुआ था ।
एडवोकेट रीमा ने बताया कि विश्व में एकमात्र हमारे देश भारत में विभिन्न धर्मों के लोग आपस में मिलजुल कर रहते हैं । और सभी धर्मों के त्यौहार मिलजुल कर मनाए जाते हैं । हमारे देश में सभी को अपने अपने तौर-तरीकों से अपने त्यौहार मनाने की स्वतंत्रता प्राप्त है । यहां त्यौहारों में आपसी भाईचारे की मिसाल देखने को मिलती है । यहां हिंदू मुस्लिम मिलकर एक-दूसरे के सुख-दुख बैठते हैं एक दूसरे के साथ मिलकर त्यौहार मनाते हैं । इन्हीं त्योहारों में एक खास त्यौहार है पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब का जन्म दिवस जिसे ईद मिलादुन्नबी के रूप में मनाया जाता है । इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग मोहम्मद साहब की याद में जुलूस निकालते हैं, कुरान की तिलावत (पाठ) कर खैरो बरकत, अमन की दुआएं मांगते हैं, फल, शिरनी (प्रसाद) बांटते हैं। घरों, मस्जिदों को सजाया जाता है । और मोहम्मद साहब द्वारा बताई बातो, जैसे कि आपसी भाईचारा बनाए रखना, अपने मां-बाप की सदैव सेवा करना, कभी किसी का दिल ना दुखाना, हमेशा सब के काम आना, सबकी इज्जत करना, बुरे कामों से दूर रहना, अच्छे व जायज काम करना, नमाज पढ़ना, रोजा रखना, गरीब मजलूम की मदद करना, मुल्क के कानूनों का पालन करना, किसी का हक ना मारना, अमानत में खयानत ना करना, आदि पर अमल करने के लिए प्रेरित किया जाता है ।
नबी मोहम्मद साहब के वालिद (पिता) का नाम मोहम्मद इब्न अब्दुल्लाह इब्न अब्दुल मुत्तलिब और वालिदा (माता) का नाम बीबी अमिना था । पैगंबर हजरत मोहम्मद के जन्म की खुशी में ईद-ए-मिलाद-उन-नबी मनाया जाता है । आज ही के दिन नबी हजरत मोहम्मद साहब ने पवित्र मक्का शहर से पवित्र मदीना शहर में हिजर क्या था । रबी उल अव्वल की 12 तारीख में ही नबी रसूल ए खुदा हजरत मोहम्मद साहब की वफात (दुनिया से पर्दा करना) हुई थी ।