गौ संरक्षण व धर्म प्रचार को समर्पित रहा माता ललिताम्बा का समूचा जीवन : ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी
👉पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की परम्परानुसार षड्दर्शन साधु समाज एवं तेरह अखाड़ों की प्रतिनिधियों की उपस्थिति में संत समाज ने तिलक चादर प्रदान कर स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज को किया श्री मानव कल्याण आश्रम का महंत नियुक्त
प्रमोद गिरि
हरिद्वार, 16 दिसम्बर। तीर्थनगरी हरिद्वार की प्रख्यात धार्मिक संस्था श्री मानव कल्याण आश्रम हरिद्वार, बद्रीनाथ की संस्थापिका ब्रह्मलीन संन्यासिनी माता ललिताम्बा की 13वीं पुण्यतिथि एवं स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज का तिलक चादर समारोह षड्दर्शन साधु समाज व तेरह अखाड़ों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में श्री मानव कल्याण आश्रम, कनखल में आयोजित हुआ। इस अवसर पर ट्रस्टी श्रीमहंत रविन्द्रपुरी, श्रीमहंत देवानन्द सरस्वती के संयोजन में संन्यासी माता ललिताम्बा को संत समाज द्वारा भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा की परम्परानुसार षड्दर्शन भेख भगवान एवं तेरह अखाड़ों, संत-महंत-महामण्डलेश्वरों की पावन उपस्थिति में ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती के सुयोग्य शिष्य स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज को तिलक चादर प्रदान कर श्री मानव कल्याण आश्रम का महंत नियुक्त किया गया।
इस अवसर पर आयोजित समारोह को सम्बोधित करते हुए जयराम आश्रम के परमाध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने ब्रह्मलीन माता ललिताम्बा और उनके परम शिष्य ब्रह्मलीन स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती को स्मरण कर गौरक्षा आन्दोलन, राम जन्म भूमि आन्दोलन में उनकी अहम भूमिका को नमन करते हुए कहा कि स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती और उनकी गुरूदेव माता ललिताम्बा त्याग, तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। उन्हांेने गौ संरक्षण व धर्म प्रचार को अपना जीवन समर्पित किया। उनके सुयोग्य शिष्य स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज अपने गुरूजनों के पदचिन्हों पर चलते हुए संस्था का विकास व संवर्द्धन करंेगे। श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत रविन्द्र पुरी ने कहा कि मानव कल्याण आश्रम सदैव धर्म प्रचार और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए समर्पित रहा है। हरिद्वार और बद्रीनाथ, अहमदाबाद में जिस प्रकार श्रद्धाभाव के साथ आश्रम तीर्थयात्रियों की सेवा की जाती है वह सेवाप्रकल्प का अनुपम उदाहरण है। स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज मानव कल्याण आश्रम के महंत के रूप में सेवा प्रकल्पों को कुशलतापूर्वक संचालित करंेगे।
मानव कल्याण आश्रम के ट्रस्टी स्वामी देवानन्द सरस्वती ने कहा कि शंकराचार्य स्मारक समिति, शंकराचार्य चौक की स्थापना पूज्य माता ललिताम्बा जी की प्रेरणा से स्वामी कल्याणानन्द सरस्वती महाराज ने की थी। हरिद्वार, अहमदाबाद, बद्रीनाथ स्थित मानव कल्याण आश्रमों की स्थापना में माता ललिताम्बा की प्रेरणा और योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। आश्रम के महंत के रूप में स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज अपने गुरूजनों के सेवा व धर्म प्रचार के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हुए संस्था की उन्नति के कार्य करेंगे।
पूर्व पालिकाध्यक्ष सतपाल ब्रह्मचारी ने गौरक्षा आन्दोलन के माध्यम से ललिताम्बा माता ने समस्त देश में गौरक्षा की अलख जगायी थीं। गौरक्षा आन्दोलन में भाग लेते हुए उन्हांेने जेलयात्रा भी की थी। ऐसी धार्मिक संस्था के उत्थान में नवनियुक्त महंत स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज अग्रणीय भूमिका निभायेंगे। श्री पंचायती बड़ा अखाड़ा उदासीन के कोठारी महंत दामोदर दास ने कहा कि मठ, मंदिर, आश्रम व अखाड़ों ने भारतीय संस्कृति व सभ्यता की रक्षा करने व धर्म प्रचार का कार्य किया। निश्चित रूप से स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज मानव कल्याण आश्रम के महंत के रूप में धर्म प्रचार की परम्परा का निर्वहन करेंगे।
श्रद्धाजंलि सभा व तिलक चादर समारोह में आये हुए संत-महंतजनों, महामण्डलेश्वरों व अखाड़ों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि संत समाज व ललिताम्बा देवी ट्रस्ट के ट्रस्टियों ने श्री मानव कल्याण आश्रम के महंत के रूप में जो जिम्मेदारी मुझे सौंपी है उसे वह ईश्वर का आदेश मानकर पूज्य गुरूजनों के पदचिन्हों चलते हुए श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े की परम्परानुसार पूर्ण निष्ठा भावना के साथ पूरी करने का प्रयास करेंगे तथा समस्त सेवा प्रकल्पों का ट्रस्टियों, श्रद्धालु भक्तजनों का सहयोग प्राप्त कर निर्विघ्न रूप से चलाया जायेगा। श्री ललिताम्बा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने कहा कि ब्रह्मलीन माता ललिताम्बा ने जिस निडरता के साथ गौहत्या विरोधी आन्दोलन में भाग लेेते हुए भारत के पूर्व प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का घेराव करने का साहस दिखाया उससे तो यही साबित होता है कि माता ललिताम्बा एक धर्मरक्षक, निर्भीक संत थी जिन्हांेने निज धर्म और गौमाता की रक्षा के लिए अपने प्राणों की परवाह न करते हुए आन्दोलन को धार देने का कार्य किया। उन्होंने संत समाज के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि माता जी की 13वीं पुण्यतिथि पर संत समाज ने जो श्रद्धाभाव प्रकट किया है उसके लिए समस्त ट्रस्टी आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी दुर्गेशानन्द सरस्वती जी महाराज कुशलतापूर्वक आश्रम की व्यवस्था संभालते हुए सेवा प्रकल्पों को विस्तार देंगे। इस अवसर पर श्री ललिताम्बा देवी ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिरूद्ध भाटी व बहादुर सिंह वर्मा ने संतजनों व अतिथियों का स्वागत किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से कोठारी महंत दामोदर दास, महंत कमल दास, महंत धीरेन्द्र पुरी, महंत बालभारती, महंत गोपालानन्द ब्रह्मचारी, महंत प्रकाशानन्द, थानापति महंत तूफान गिरि, निरंजनी अखाड़ा के आशुतोष पुरी, महंत अरविन्द पुरी, महंत जगदीश सिंह, स्वामी प्रकाशानन्द, स्वामी कमलानन्द समेत षड्दर्शन साधु समाज के संत, महंत, महामण्डलेश्वरों ने अपने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर संतोष ध्यानी, प्रशादानन्द, स्वामी मंजूनाथ, अर्पित मिश्रा, पार्षद विनित जौली, अनिल मिश्रा, राजेश शर्मा, सुनील अग्रवाल, राधेकृष्ण शर्मा, प्रशांत सैनी, सचिन अग्रवाल, लोकेश पाल, नागेन्द्र राणा, नितिन माणा, मनोज परलिया, मोहित प्रजापति, दिनेश बहुगुणा, वरिष्ठ पत्रकार संजय वर्मा, कुलभूषण शर्मा, विनित गिरि, ब्रह्मदत्त, सुरेन्द्र मिश्रा, रूपेश शर्मा, अनुपम त्यागी, भारतनन्दा, विनोद पाठक, सूर्यकान्त शर्मा, आदर्श पाण्डेय, रवि सागर, नितिन गिरि, अंकुर राजपूत, निमेश शर्मा समेत अनेक संत-महंत व गणमान्यजन उपस्थित रहे।