शरद यादव को उच्च सदन से हटाया जाना असंवैधानिक : रामनरेश यादव
हरिद्वार। वरिष्ठ राजनेता शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता समाप्त करने पर कल्याणकारी जनतांत्रिक पार्टी व अन्तर्राष्ट्रीय उपभोक्ता कल्याण समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामनरेश यादव ने उनसे दिल्ली स्थित आवास पर भेंट की तथा भारत से समाप्त हो रही लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए देश एवं संवैधानिक व्यवस्था को बचाने पर विचार-विमर्श किया। भारत की संसद द्वारा सर्वश्रेष्ठ सांसद पुरुस्कार से सम्मानित तथा देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था समाप्त करने के विरोध में दो बार लोकसभा सदस्यता से त्यागपत्र देने वाले जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ समाजवादी नेता शरद यादव से मिलकर अपना सहयोग देने की पेशकश करते हुए रामनरेश यादव ने कहा कि शरद यादव वर्तमान परिपेक्ष में एक राजनेता न होकर एक संस्था हैं जिसमें किसी भी विरोधी दल की दो राय नहीं होती है। संसद में राजनैतिक मापदण्डों से बिना विचलित हुए अपनी बात बेबाकी के साथ रखने वाले शरद यादव की उच्च सदन से सदस्यता समाप्त करना एक योग्य राजनेता को सदन में बोलने से रोकना जैसा है। पूर्व में भी देखा गया है इस प्रकार के प्रकरणों पर इतनी तेजी नहीं दिखायी गयी जितनी कि शरद यादव के मामले में दिखायी गयी है। उन्हांेने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शरद यादव जैसे राजनेताओं के राज्य सभा में बोलने के अवसर समाप्त होते रहेंगे तो यह सरकार के लिए भी उचित नहीं होगी। विदित है कि राज्यसभा इसी प्रकार के गुणवान एवं योग्य राजनेताओं के प्रवेश के लिए बनायी गयी थी कि किन्हीं कारणों से योग्य व्यक्तित्व के धनी राजनेता यदि लोकसभा में चुनकर न आ पायें और उनकी उपस्थिति किसी भी सदन में आवश्यक प्रतीत होती है, यदि शरद यादव जैसे नेता ही राज्यसभा में नहीं रहेंगे तो संविधान द्वारा बनाये गये उच्च सदन के उद्देश्य एवं उपयोगिता ही नगण्य हो जायेगी। रामनरेश यादव ने कहा है कि उच्च सदन की गरिमा बनाये रखने के लिए वे संघर्ष करेंगे इसके लिए जो भी कुर्बानी देनी पड़ी वे तैयार रहेंगे।
रामनरेश यादव ने संसद के उच्च सदन राज्यसभा से शरद यादव की सदस्यता समाप्त करने संबंधी निर्णय को अलोकतांत्रिक ढंग से की गई तानाशाही कार्यवाही बताते हुए कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी आपातकाल की अवधि बढ़ाना चाहती थीं तथा दूसरी बार जब जैन हवाला काण्ड में उनका नाम घसीटा गया तो उन्हांेने लोकसभा से स्वयं इस्तीफा दे दिया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा कई प्रदेशों में जनादेश के विरुद्ध गठित की गई भाजपा सरकारों पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा कि भाजपा सरकार बना तो लेती है लेकिन इसे सरकार चलाना नहीं आता है इस बात को भारत की जनता के साथ ही विदेशी भी समझने लगे हैं। अचानक लागू की गई नोटबंदी को मोदी सरकार का सबसे बड़ा आर्थिक घोटाला बताते हुए कहा कि पुराने करेंसी को बंद कर नई करेंसी लाने में देश पर बहुत बड़ा आर्थिक बोझ के साथ ही बिना किसी की राय मशविरे के लागू की गई जीएसटी से देश की आर्थिक स्थिति को बड़ा झटका लगा है। देश से समाप्त हो रहे लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था को बचाने के लिए धर्म निरपेक्षता, लोकतंत्र, समाजवाद एवं सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले सभी दलों के एकजुट होने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्हांेने कहा कि देश में भय का वातावरण बनाकर सरकार का संचालन करने वाली पार्टी से व्यापारी, उद्योगपति तथा ब्यूरोक्रेसी का भी मोहभंग हो गया और ईवीएम के सहारे देश की सत्ता पर कब्जा करना और अधिक दिन चलने वाला नहीं है।