अभिव्यक्ति के समय उम्र और रिश्ते का लिहाज़ करें - गिरि
विश्वगुरु शंकराचार्य दसनाम गोस्वामी समाज के संस्थापक एवं संरक्षक श्री राम निवास गिरि गोस्वामी जी ने बताया कि हम सभी का यह कर्तव्य है, कि हम सभी को सभ्य समाज के निर्माण के लिए अपने विचार एवं भावनाओं की अभिव्यक्ति के समय एक दूसरे की उम्र एवं रिश्ते को ध्यान में रखकर ही उचित मर्यादा में व्यवहारिक होना चाहिए, जिससे सभ्य समाज का निर्माण हो सके । हर उम्र के मनुष्य को मर्यादा और संस्कारों की प्रेरणा प्रदान कर भारतीय संस्कृति की रक्षा की जा सके । कई बार देखने में आता है कि बुजुर्ग लोग बच्चों के सामने और बच्चे बुजुर्गों के सामने अमर्यादित शब्द, कृत्य या व्यवहार करके अभिव्यक्ति प्रस्तुत करते हैं, जो उनके उम्र और रिश्ते के लिहाज़ से बिल्कुल भी शोभा नहीं देता है, शायद वह लोग इसको अभिव्यक्ति की आजादी समझते समय यह भूल जाते हैं, कि उनकी इस अभिव्यक्ति की आजादी के कारण समाज का स्वरूप दूषित हो रहा है, ऐसी विचार धारा बाले लोग अपने ही घर, परिवार, समाज की सम्मानीय मातृशक्ति के लिहाज़ को इग्नोर कर अभिव्यक्ति करते हुए देखे जा सकते हैं, जो उन्हें उम्र और रिश्ते के लिहाज़ से बिल्कुल भी सोभा नहीं देता है। इस अभिव्यक्ति की आजादी का दुरुपयोग करके डिजिटल मीडिया, टीवी सीरियल एवं बॉलीवुड के सिनेमा ने भारतीय सभ्य समाज को पूरी तरह से दूषित किया है, जिसके परिणाम स्वरूप देश में तमाम तरह के अपराध होते ही रहते हैं, यह सब पैसे की चकाचौंध और सरकार द्वारा अनियंत्रित असामाजिक डिजिटल प्रसारण की खुली छूट के कारण हो रहा है । भारत के नागरिक भी इस फूहड़पन के प्रसारण को मनोरंजन के नाम और इग्नोर करते रहते हैं, यही अभिव्यक्तियाँ अगर एक सभ्य परिवार के सदस्यों के साथ कोई दूसरा करे, तो वो उसे कभी स्वीकार नहीं करेंगें, जबकि असलियत यह है कि उन अभिव्यक्तियों का प्रभाव सभी मनुष्यों के दिमाग पर होता है और उसके दुष्परिणाम भी होते हैं। भारत के नागरिकों को चाहिए कि अभिव्यक्ति करते समय हर उम्र और रिश्ते के लिहाज़ को ख्याल रखकर ही समाज में व्यवहार करें एवं डिजिटल फूहड़पन को रोकने के लिए उचित कदम उठाएं जिससे भारत के सभ्य समाज को बनाये रखा जा सके ।