अभिव्यक्ति से बनता है व्यक्तित्व : रामनिवास गिरी

अभिव्यक्ति से बनता है व्यक्तिव : रामनिवास गिरी


विश्व गुरु शंकराचार्य दशनाम गोस्वामी समाज के संस्थापक संरक्षक रामनिवास गिरी गोस्वामी ने बताया कि मनुष्य के विचारों की अभिव्यक्ति जिस तरह की होती है दूसरे लोग उसी के आधार पर अपनी क्रिया या प्रतिक्रिया करते हैं, यह विचारों की अभिव्यक्ति शब्दों को बोलकर, मौन रहकर, शारीरिक हावभाव से मन के विचारों को प्रकट करने से होती है, सामने बाले के व्यक्तित्व के अनुकूल या प्रतिकूल होने बाली अभिव्यक्ति, व्यक्ति के स्वयं के विचारों पर निर्भर करती है, इस अभिव्यक्ति के अनुसार ही सामने बाले आगे अपने  जीवन के मार्ग का चयन कर दूर या पास होते है।इसलिए इंसान को कुछ भी व्यवहार करते समय यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि यह अभिव्यक्ति है और इसके प्रभाव सामने बाले पर एक सीमा के बाद अवश्य पड़ेंगें । अभिव्यक्ति के समय हुई भूल को एहसास होने पर समय रहते स्वीकार कर सुधारा भी जा सकता है, ऐसा वही कर सकते हैं जो स्वयं के अभिमान से ज्यादा दूसरों के स्वाभिमान को महत्व प्रदान करते हैं ।उन्होंने उक्त अभिव्यक्ति को कहा कि मेरी इस अभिव्यक्ति को कोई भी व्यक्ति, व्यक्तिगत न लें, यह अभिव्यक्ति जनहित में मार्गदर्शन हेतु प्रकट की जा रही है।