लोक निर्माण विभाग की भूमि पर खड़े हरित पेड़ों की आड़ में सामाजिक संस्था द्वारा किया जा रहा है व्यवसाय का इंतजाम
हरिद्वार। तीर्थ नगरी में अधिकतर संस्थाएं समाज सचेतक और जनहितकारी कार्यों को करने का स्वांग रचने वाली संस्थाओ का दूसरा रूप यह भी है कि पहले पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पहले सरकारी जमीन पर कब्ज़ा कर पेड़ लगाओं ओर बाद में हरित पेड़ो को उखाड़कर टीन सेट लगाकर कबजा करो और बाद में व्यवसायिक दुकान बनाकर धन कमाने का जरिया बनाओ खड़खड़ी हिल बाई पास रोड पर एक सामाजिक संस्था द्वारा भी पीडब्ल्यूडी की जमीन को कब जाने की दृष्टि से पहले तो हरे पेड़ लगाए गए और आप उन पेड़ों की आड़ में टीन सेट डालकर उक्त जमीन पर दुकान बनाने का षडयंत्र रचा जा रहा है सूत्रों के अनुसार इस षड्यंत्र में सत्तारूढ़ दल का नेता कम अपने आप को सामाजसेवी मानने वाला व एक राशन वाला भी शामिल है। अधिकतर सामाजिक संस्थाओं का इतिहास उठा कर देखा जाए सामाजिक संस्था को चलाने वाले लोग केवल समाज सेवा का चोला ओढ़ कर या तो सरकारी भूमि पर कब्जा करते हैं या भोले वाले समाज को ठगने का काम करते हैं कुछ ही संस्थाएं समाज में सही रूप में कार्य करती हैं जबकि इन सही संस्थाओं की आड़ में अन्य संस्थाएं भी समाज सेवा का चोला ओढ़ कर भ्रष्टाचार में लगी रहती है इन संस्थाओं का मात्र एक ही उद्देश्य होता है धन उपार्जन करना इन संस्थाओं द्वारा पहले सरकारी भूमि पर पेड़ लगाओ फिर पेड़ हटाओ और उन पर व्यवसायिक निर्माण करा कर धनोपार्जन करो।धर्म *कर्म*सेवा सबका उद्देश्य एक===पैसा पैसा और पैसा।