भारतीय संस्कृति पर हावी होती पाश्चात्य संस्कृति
कहाँ है भारत ?
सचिन तिवारी
भारतीय संस्कृति और सभ्यता को अपने पैरों तले कुचलकर वैलेंटाइन डे मनाने वालों को अपने देश के तिथि त्योहार तक नही पता होते, सुबह उठकर अपने माता पिता के पैर छूना नही याद होगा लेकिन गर्लफ्रैंड का हाथ चूमना नही भूलते, घर में माँ पुरानी साड़ी में काम चला रही होगी लेकिन गर्लफ्रैंड को महँगी ड्रेस दिलाना नही भूलते, अगर आज इस देश की यह हालत हुई है तो इसमें जहाँ 30 % लड़कों का योगदान है तो वहीं 70% लड़कियों का, क्योंकि अगर कोई लड़की भाव न दे तो किसी लड़के की हिम्मत नही उससे बात कर ले, लेकिन लड़कियों के घूमने और ऐश बाजी के इस चस्के ने पूरे समाज को नग्नता का बाजार बना दिया, लड़कियों को देवी और औरतों को माँ का पवित्र स्थान देकर पूजने वाला यह देश अगर आज उनको कामुकता भरी नजरों से देखता है तो इसमें कही न कही उतना ही वो भी दोषी हैं जितना कि समाज ।संयुक्त परिवार से एकल परिवार में रहना अपने बच्चों को समय न देकर अपने काम और अपनी ऐशो आराम में पड़े रहना अभिभावकों की सबसे बड़ी कमी है, जब उन्हें संस्कार देने का समय होता है तब उनको सनी लियोनी के गाने पर कैसे डांस करें यह सिखाया जाता है, जब से माँ मोम और पिताजी डैड, और भैया ब्रो गए तब से इस देश की संस्कृति और सभ्यता खत्म हो गई, जब से रही हो का रही है, और रहे हो का रहा है हो गया तब से एक दूसरे के प्रति सम्मान खत्म हो गया ।जब से इस देश मे रामायण महाभारत की जगह वेब सीरीज और हास्य के नाम पर परोसी जा रही अश्लीलता ने लिया तब से इस देश की आत्मा अपनी अंतिम सांसे ले रही है ।हर देश की पहचान उसकी संस्कृति और सभ्यता से होती है और जब इस देश की संस्कृति और सभ्यता ही नही रही तो देश कहाँ रहा, आज सबसे बड़ा सवाल यही है कि कहाँ है भारत ?