मठ मन्दिरों व भवनों का स्वरूप हो भगवा :संजय चोपडा

मठ मन्दिरों व भवनों का स्वरूप हो भगवा :संजय चोपडा


हरिद्वार 8 फरवरी। महाकुंभ मेला 2021 के भव्य आयोजन से पहले धर्मनगरी हरिद्वार, ऋषिकेश माँ गंगा के किनारे हरिद्वार से लेकर गंगोत्री तक बसे समस्त भवनों, मठ-मन्दिरो इत्यादि गतिविधियों को भगवा स्वरूप दिए जाने की मांग को लेकर पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष, भाजपा नेता संजय चोपड़ा के नेतृत्व में अलकनंदा घाट पर माँ गंगा के समीप सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ विचार मंथन परिचर्चा के माध्यम से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मांग की शौर्य का प्रतीक भगवा स्वरूप गंगा किनारे सभी आश्रम मठ-मन्दिरो को पूर्ण रूप से स्थापित किया जाने की मांग को दोहराया।इस अवसर पर पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष, भाजपा नेता संजय चोपड़ा ने कहा आने वाले कुंभ मेले 2021 के दृष्टिगत धर्मनगरी हरिद्वार के इतिहास व पौराणिक धरोहर के साथ साथ तीर्थाटन अडवेंचर में सम्मलित किया जाना चाहिये वहीं हरिद्वार से गंगोत्री तक माँ गंगा के आंचल, गंगा के समीप सभी धार्मिक गतिविधियों व आश्रम, मठ-मन्दिरो का एक भगवा स्वरूप प्रधान किया जाना चाहिए ताकि देश-दुनिया में उत्तराखंड की एक नई पहचान के साथ धर्म प्रेमी व श्रद्धालुओं को आकर्षित किया जा सके उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनी कैबिनेट की बैठक में धर्मनगरी हरिद्वार को भगवा स्वरूप प्रधान किये जाने की योजना को पास किया था लेकिन काफी समय बीत जाने के उपरांत इस और सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए सामाजिक संगठनों की इस धार्मिक सोच का स्वागत करते हुए शीघ्र ही धर्मनगरी हरिद्वार सहित गंगा किनारे सभी गतिविधियों को भगवा स्वरूप प्रधान किया जाना एक रचनात्मक और पौराणिक कार्य होगा।पंडित रविन्द्र कीर्तिपाल, प्रभात चौधरी, मनीष शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा धर्मनगरी हरिद्वार का एक पौराणिक इतिहास कण-कण में बोलता है जैसे कि दक्ष मंदिर, मनसा देवी, चंडी देवी, ब्रह्मकुंड, बिलकेश्वर, सतिकुण्ड, नीलेश्वर धर्मनगरी के कोने-कोने में पौराणिक मंदिरो का हमारे धर्म शास्त्रों में उल्लेख मिलता है इसी के दृष्टिगत धर्मनगरी हरिद्वार को आने वाले कुंभ मेला 2021 से पूर्व धार्मिक मान्यताओं के साथ भगवा स्वरूप प्रधान किया जाना चाहिये।इस अवसर पर हरिद्वार, ऋषिकेश सहित गंगोत्री तक माँ गंगा किनारे मठ-मन्दिरो व सामाजिक गतिविधियों को भगवा स्वरूप प्रधान किये जाने की मांग करते धर्मशाला रक्षा समिति के सभापति पंडित चन्द्रप्रकाश शर्मा, व्यापारी नेता राजेश खुराना, श्रमिक नेता आर.एस. रतूड़ी, पंडित सादुशरण, ओमप्रकाश भाटिया, छोटेलाल शर्मा, अशोक शर्मा, दुषियत पंडित आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।