सन 2022 के चुनाव में दमदार छवि व लोकप्रिय नेता ही भाजपा की उत्तराखंड में नैय्या को लगा सकते हैं पार
उत्तराखंड की सियासत का उतार-चढ़ाव थमने का नाम नहीं ले रहा है राजनीतिक सूत्रों के अनुसार एक प्राइवेट संस्था द्वारा देश में लगातार भारतीय जनता पार्टी के गिरती लोकप्रियता को लेकर जहां एक और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ R.S.S. द्वारा हर राजनीतिक घटनाक्रम पर गंभीर चिंतन के साथ मंथन किया जा रहा है तो वहीं दिल्ली की हार के बाद भाजपा के उच्च पदों पर बैठे संगठन व सरकार में बैठे मुखियाओं के ऊपर गाज गिरना तय माना जा रहा है।बारिक विषयों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकर्ता व कुछ निजी प्राइवेट संस्थाओ की सर्वे रिपोर्ट में सूत्रों के अनुसार यह पाया गया है कि उत्तराखंड के आने वाले 2022 के चुनाव के मद्दे नज़र उत्तराखंड में पुनः सरकार की वापसी दो ही व्यक्ति कर सकते है जिनकी सीधी पकड़ कार्यकर्ताओं व जनता के बीच हो और जनता के भी लोकप्रिय हो। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार भाजपा में इस समय दो नेता गढ़वाल से आते हैं एक नेता केंद्र सरकार में मंत्री है, दूसरा नेता राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री है और पुरानी पृष्ठभूमि को देखे तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विद्यार्थी परिषद में भाजपा की उत्तर प्रदेश की सरकार में मंत्री रहते हुए उत्तराखंड में अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं सूत्रों से यह पता लगा है कि सर्वे के माध्यम से उत्तराखंड में लगातार भाजपा के गिरते ग्राफ को संतुलित करने में व विधानसभा चुनाव 2022 में यह चेहरे दमदार छवि के साथ साथ उत्तराखंड में भाजपा की नैया को पार लगा में सफल हो सकते हैं ।देखने वाली बात यह होगी क्या भाजपा अब कोई बड़ा कदम उठा सकती है या फिर भाजपा अब तक घटते हुए जनाधार पर जनसमर्थन वाले नेता को तर्ज़ी देेेेती है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सियासी गर्मा-गर्मी इसी प्रकार चलती रही तो उत्तराखंड में भाजपा का नुकसान होना लगभग तय माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता दिल्ली की हार को पचा नहीं पा रहे हैं समय रहते भाजपा अब बिहार उत्तराखंड उत्तर प्रदेश में फूंक-फूंक कर कदम रख रही है केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली के हार को पचा नहीं पा रहा है देखने वाली बात अब यह होगी कि उत्तराखंड की राजनीति में अब ऊंट किस करवट बैठेगा।