केन्द्र सरकार के निर्देश के बाद ही लिया जाएगा मंदिर खोलने का निर्णय:सतपाल महाराज

*प्रदेश के आला अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये* 
*महाराज ने की मंदिरों के कपाट खोलने के संभावनाओं की समीक्षा* 
 *केन्द्र सरकार के निर्देश के बाद ही लिया जाएगा निर्णय* 


नीशिथ सकलानी


देहरादून।कोरोना संक्रमण की रोकथाम की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन के चलते इस समय उत्तराखंड के सभी प्रसिद्ध मंदिर भी बंद पड़े हैं। ज्ञात हो कि उत्तराखण्ड के चारधाम यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, भविष्य बदरी और तुंगनाथ सहित कई ऐसे मंदिर हैं जिनके कपाट धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के तहत शरद ऋतु के दौरान बंद कर दिए जाते हैं और फिर ग्रीष्म ऋतु में एक नियत तिथि पर उन्हें श्रृद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना वाइरस के संक्रमण की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण इन प्रसिद्ध मंदिरों के द्वार खोलने को लेकर असंमजस की स्थिति बनी हुई है।धार्मिक और पौराणिक दृष्टि से विश्वविख्यात उत्तराखंड के प्रसिद्ध मंदिर यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ और भविष्य बदरी जिनके कपाट खुलने का समय अब निकट आ चुका है। इन मंदिरों को खोलने की संभावनाओं को लेकर उत्तराखंड के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने आज अपने देहरादून स्थित आवास से राज्य के आला अधिकारियों सचिव पर्यटन, अपर सचिव पर्यटन सहित जिलाधिकारी रूद्रप्रयाग, जिलाधिकारी उत्तरकाशी, जिलाधिकारी चमोली, ए. पी. चमोली और ए. पी. रूद्रप्रयाग से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिये बातचीत कर सघन समीक्षा की।प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री सतपाल महाराज ने बताया कि उत्तरकाशी, चमोली और रूद्रप्रयाग इन तीनों जिलों में वर्तमान में न तो कोई कोरोना पॉजिटिव है और न ही यहाँ किसी प्रकार का कोई संक्रमण है। उन्होने कहा कि हमने यमनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बदरीनाथ, तुंगनाथ और भविष्य बदरी मंदिरों  को खोले जाने की संभावनाओं की समीक्षा करने के पश्चात उसे लिखित में केन्द्र सरकार को भेज रहे हैं। उन्होने कहा कि ये सभी मंदिर खोले जा सकते हैं या नहीं?   यदि खोले जा सकते हैं तो क्या वहाँ आवश्यक पुजारी ही जायेंगे अन्यथा कोई नहीं जायेगा। यह सब केन्द्र सरकार के निर्णय और निर्देश के बाद ही तय किया जायेगा। श्री महाराज ने कहा कि  जहाँ तक यात्रा मार्ग पर धर्मशालाओं को खोलने की बात है इस बारे में जब लॉकडाउन समाप्त होगा तभी कुछ निर्णय लिया जायेगा। उन्होने कहा कि कोरोना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते अभी तो केवल इस बात पर विचार हो रहा है कि श्रृद्धालुओं के बिना और सोशल डिस्टेंस को ध्यान में रखते हुए इन पौराणिक मंदिरों को खोलने के बाद वहां पूजा-पाठ किस प्रकार से प्रारम्भ करवाई जाये। उन्होने कहा कि जो भी निर्णय होगा इस संदर्भ में मीडिया को सूचना दे दी जायेगी।