राजनैतिक महत्वाकांक्षा की भेट चढा राहत वितरण कार्य
हरिद्वार। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के लाक डाउन के दौरान शासन प्रशासन द्वारा यह स्लोगन दिया गया था कि तीर्थ नगरी में किसी भी व्यक्ति को भूखा नहीं सोने दिया जाएगा विगत रात्रि खोखला साबित होता नजर आया। बताते चलें कि पिछले 40 दिनों से लगातार कई संस्थाएं फक्कड़ बाबाओं ,मजदूर व निर्बल वर्ग के लोगों के लिए भोजन परोसने का काम कर रही थी विगत रात्री से कई संस्थाओं द्वारा एकाएक खाना देना बंद होने से हजारों की संख्या में भूखे प्यासे फक्कड़ बाबा व मजदूरों को रात्रि में भूखे पेट ही सोना पड़ा जबकि शासन प्रशासन द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं जो कल रात्रि उत्तरी हरिद्वार के दूधिया वन के गंगा किनारे बंदे पर खोखला साबित होता नजर आया। आपदा प्रबंधन अधिकारी नरेंद्र यादव से वार्ता करने पर उन्होंने बताया कि उत्तरी हरिद्वार के दूधिया वन क्षेत्र में मास्टर सतीश शर्मा व विपिन शर्मा की टीम के द्वारा अपनी संस्थाओं के माध्यम से फक्कड़ बाबाओ को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था उनसे वार्ता हो रही है शीघ्र ही भोजन की व्यवस्था की जाएगी। बताते चलें कि लाक डाउन व सोशल डिस्टेंस के चलते उत्तरी हरिद्वार के आश्रमों में चलने वाले भंडारे बंद होने से पिछले 40 दिनों से घुमक्कड़ फक्कड़ बाबाओ के सामने भोजन की समस्या को कुछ संस्थाओं ने मानव सेवा करने का धर्म समझकर लगातार फक्कड़ बाबा के लिए बिना किसी स्वार्थ के एक समय का भोजन उपलब्ध कराने का काम किया। वही संकट के इस समय मे भी शहर में कुछ प्रमुख राजनीतिक दलअपने अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए राशन किट व भोजन चेहरा देखकर बांट रहे हैं। कई वार्डो में पार्षद भी केवल पार्टी मतदाताओं तक सीमित रहकर राशन की किट व भोजन बांटते नजर आ रहे है जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की जनता से अपील करते हुए कहा था कि हमें अपने पड़ोसी का ध्यान रखना चाहिए लेकिन संर्कीण मानसिकता रखने वाले लोगों की वजह से तीर्थ नगरी में इस आपदा की घड़ी में भी राजनीति सिर चढ़कर बोल रही है और नेताअपने अपनेसमर्थक मतदाताओं को रिझाने के लिए राशन किट व भोजन उपलब्ध करा रहे है लेकिन इन पार्टियों के नेताओ ने किसी भी मध्यमवर्गीय परिवारों की ओर झांकना भी उचित नहीं समझा । वहीं दूसरी ओर तीर्थनगरी में भूखे को अन्न प्यासे को पानी व मानव कल्याण की बात करने वाली बड़ी बड़ी संस्थाओं में से कुछ संस्थाओं ने सरकार में अपनी पहचान बनाने के साथ साथ अपनी बेशकीमती सम्पत्तियों को बचाने के लिए केन्द्र व प्रदेश सरकार के राहत कोष के लिए धन और अन्न उपलब्ध कराया । मानव कल्याण की बात करने वाली इन बड़ी-बड़ी संस्थाओं द्वारा पिछले 40 दिनों से मानव कल्याण की कोई कार्य धरातल पर नहीं किया जा रहा है जबकि इस तीर्थ नगरी की छोटी मोटी संस्थाओं ने बड़ा दिल दिखाते हुए तीर्थ नगरी में पिछले 40 दिनों से लगातार गरीब फक्कड़ बाबा मजदूर निर्बल वर्ग के लिए दिल खोलकर भंडारे चलाएं जिससे तीर्थ नगरी में एक भी दिन कोई व्यक्ति धोखा नहीं सोया। अगर यह संस्थाएं तीर्थ नगरी में नहीं होती तो तीर्थ नगरी के घुमक्कड़ बाबा ओ व मजदूरों के सामने भोजन की समस्या किसी चुनौती से कम नही थी जिसके चलते ऐसे लोगों के सामने भोजन की व्यवस्था करना मानो असंभव था।