*ऐसे में कैसे कर पायेगी भाजपा 2022 का चुनावी किला फतह की
*प्रदेश में ब्यूरोक्रेसी का कमाल सिर चढ़कर कर रहा है धमाल
हरिद्वार।वैश्विक महामारी covid-19 कोरोना वायरस के चलते सरकार को जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना चाहिए था लेकिन प्रदेश सरकार जनता के साथ कही खड़ी हुई कही दिखाई नहीं दी। सरकार को ऐसे समय में अच्छा शासन अच्छा प्रशासन जनता को देना चाहिए था लेकिन उत्तराखंड सरकार जनता के मंसूबों पर खरा उतरते दिखाई नहीं पड़ रही है।जिसका खामियाजा भाजपा सरकार सन 2022के विधानसभा चुनाव में भुगत सकती है।भाजपा सरकार में ब्यूरोक्रेसी सिर चढ़कर बोल रही है जिसका जीता जागता उदाहरण 2 दिन पहले उत्तराखंड सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री की बैठक में सचिवों का ना पहुंचना यह दर्शाता है की सरकार में ब्यूरोक्रेसी कितनी सिर चढ़कर बोल रही है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार सरकार में बैठे मंत्रियों की कोई सुनने को तैयार नहीं है तो भाजपा के आम कार्यकर्ता व जनता की क्या स्थिति होगी यह किसी से नहीं छीपी है जबकि सरकार प्रदेश की नीति निर्धारक होती है। ब्यूरोक्रेसी सरकार की योजनाओं को धरातल पर अमलीजामा पहनाने में अनियमितताएं बरत रही है जिसका जीता जागता उदाहरण हरिद्वार की भूमिगत विद्युत लाइन हो या फिर गैस पाइपलाइन। ब्यूरोक्रेसी सरकार की योजनाओं को धराशाई कर भाजपा के 2022 के चुनावी किले में धीरे धीरे छेद कर रही है जैसे किसी घड़े में छेद हो जाता है तो वह धीरे धीरे खाली हो जाता है तो उसी प्रकार ब्यूरोक्रेट सरकार की सरकारी योजना में लेट लतीफ धरातल पर उतार कर सरकार को फेल करने में जुटा हुआ है राजनीतिक सूत्रों का यह भी कहना है कि उत्तराखंड के 20 वर्षों के कार्यकाल में केवल दो ही मुख्यमंत्री उत्तराखंड का विकास कर पाए हैं जिनमें एक मुख्यमंत्री का देहांत हो चुका है तो दूसरा पूर्व मुख्यमंत्री एक पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री के पद को सुशोभित कर रहे है। भाजपा सरकार ने समय रहते सत्ता की कुंभकर्णी नींद से जाग कर ब्यूरोक्रेट्स पर अंकुश नहीं लगाया तो भाजपा सन 2022 के चुनावी किले को फतह नहीं कर पाएगी। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि सभी चुनाव देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर नहीं जीते जाएंगे क्योंकि केंद्र व राज्य के चुनाव में काफी अंतर होता है प्रदेश में सरकार की उपलब्धियों पर चुनाव जीता जाता है जबकि केंद्र में राष्ट्रीय स्तर के मुद्दों पर चुनाव समर को फतेह किया जाता है। वर्तमान समय में प्रदेश में सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी का है प्रदेश का हर वर्ग बेरोजगार हो चुका है और प्रदेश सरकार इस बेरोजगारी के मुद्दे को राज्य में किस रूप में लेगी। प्रदेश सरकार बेरोजगारी को मिटाने में कामयाब होगी यह सरकार की सोच के काल के गर्भ में छुपी है उत्तराखंड का मुख्य व्यवसाय टूरिज्म पर आधारित है चाहे वह चार धाम यात्रा हो या फिर हरिद्वार का छुट्टियों का सीजन सावन कावड़ मेला सब के सब लोग यात्रिया पर ही आधारित है लेकिन कोविड-19 महामारी कोरोना वायरस के चलते उत्तराखंड का व्यापार चौपट हो चुका है जिससे व्यापारियों के सामने ही नहीं बल्कि हर वर्ग के सामने रोजी रोटी की दिक्कत पैदा हो गई है जिसका सामना करते करते व्यापारी वर्ग ही नहीं अपितु अन्य वर्ग के लोग भी लॉकडाउन के चलते प्रदर्शन करने पर उतारू हो चुके हैं जबकि सरकार को चाहिए था कि इसे में चुनाव के मद्देनजर लोगों के बिजली, पानी, शिक्षा, चिकित्सा के बिलों को समाप्त कर राहत देने का समय था और लोगो को रोजगार मुहैया कराकर बेरोजगारी जैसे मुद्दे समाप्त कर रोजी रोटी की दिक्कत को समाप्त कर जनता को अपने पक्ष में खड़े करती।लेकिन सरकार ने लोगो का इस ओर से ध्यान हटाकर आत्मनिर्भर बनने का फार्मूला बताकर लोगों को खुला छोड़ दिया जिसका खामिया जनता से लेकर सरकार तक किसी से नहीं छिपा है तो क्या ऐसे में सरकार सन 2022 का चुनावी किला फतह कर पाएगी?