श्रावण मास में तीर्थनगरी कावड़ियों से वंचित गंगा घाट शिवालय मठ मंदिर हुए सुनसान

*श्रावण मास में तीर्थनगरी कावड़ियों से वंचित गंगा घाट,  शिवालय, आश्रम, मठ मंदिर हुए सुनसान 


*कांवड़ मेला न होने से छोटे बड़े व्यापारी ,मजदूर ,किसान के चेहरे मुरझाए


प्रमोद गिरि


हरिद्वार। श्रावण मास में तीर्थ नगरी हरिद्वार ऋषिकेश नीलकंठ गंगा घाट, शिवालय, मठ मंदिर, आश्रम में जहां लाखों-करोड़ों शिव भक्तों की आवाजाही पिछले वर्षों के इतिहास में देखी जा सकती है।तो वही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते तीर्थ नगरी के गंगा घाट शिवालय मठ मंदिर आश्रम सुनसान नजर आ रहे हैं। कोरोना वायरस की मार ने जहां तीर्थ नगरी हरिद्वार,कनखल, ऋषिकेश नीलकंठ के शिवालय, गंगा घाट, मठ मंदिर आश्रम को सुना सुना करा दिया है तो वहीं श्रावण मास के कावड़ मेला यात्रा ना होने से तीर्थ नगरी हरिद्वार से लेकर दिल्ली हरियाणा पंजाब उत्तर प्रदेश के छोटे व्यापारी से लेकर बड़े व्यापारी तक को हिला कर रख दिया है। श्रावण मास के अंतर्गत जहां बरसात के दौरान व्यापार ठंडा हो जाता था पिछले कई वर्षो से भगवान भोलेनाथ की अनुकम्पा से बिना किसी भेद भाव के हिन्दू मुसलमान समुदाय के छोटे बड़े व्यापारियों व मजदूर किसान को अच्छी खासी कमाई हो जाती थी। लेकिन कोरोना वायरस की महामारी से निपटने के लिए सरकार ने इस वर्ष श्रावण मास का कावड़ मेला स्थगित करने से जहा छोटे बड़े व्यापारी मजदूर किसान को कोरोना वायरस की चपेट में आने से तो बचा दिया लेकिन सरकार की कोई ठोस नीति ना होने के कारण  इस कावड़ से जुड़े बड़े तबके को भुखमरी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया। पिछले कई महीनों से कोरोना वायरस महामारी के लाक डाउन का दंश झेल रहे इस तबके के लोगों के सामने आने वाले समय में रोटी के लाले पड़ने की संभावना जताई जा रही है पर इस और शासन-प्रशासन कोई ठोस कदम या नीति बनाने को तैयार नहीं है। तीर्थ नगरी का हर व्यक्ति चाहे वह शिवालय की सेवा करने वाला पण्डित हो या बाबा,गंगा घाट पर फूल प्रसाद बेचने वाला मजदूर हो या छोटा दुकानदार या फिर बड़े बाजारों में बैठे बड़े दुकानदार, होटल,आश्रम मठ मंदिर,परिवहन विभाग,भारतीय रेल,टैक्सी मैक्सी सभी लोगो का श्रावण मास के कांवड़ मेले से अच्छा लाभ अर्जन होता था। लेकिन इस वर्ष कांवड़ मेला न होने से लाखों लोगो अच्छा खासा आर्थिक नुकसान होने से सभी लोगों के सामने बड़ी समस्याएं मुंह फैलाए खड़ी हैं चाहे वह बिजली पानी का बिल हो या फिर बच्चों के स्कूल की फीस या फिर बैंको की किस्त हो या घर के खर्च सभी लोग आर्थिक नुकसान के चलते परेशान है। इस बड़े समूह के लोगों के चेहरों पर मानसिक तनाव देखा जा सकता है।भगवान भोलेनाथ ही इस वर्ष कांवड़ मेला से जुड़े इस बड़े समूह को बचा सकते है क्योंकि सरकार का इस और कोई विशेष ध्यान नहीं है। श्रावण मास के कावड़ मेले में कई प्रदेशों से करोड़ों की संख्या में शिव भक्त तीर्थ नगरी पहुंचकर शिवालय मठ मंदिर आश्रम होटल व तीर्थनगरी को  गुलजार रखते थे तो इस वर्ष महामारी के चलते श्रावण मास में तीर्थ नगरी भोलेनाथ के भक्तों से जहां वंचित है तो वही शिव भक्तों द्वारा लगाए जाने वाले जयकारों से तीर्थ नगरी सुनी सुनी दिखाई दे रही है।